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“काकरोच जनता पार्टी” का शक्ति प्रदर्शन फुस्स! सोशल मीडिया की भीड़ जंतर-मंतर तक नहीं पहुंची, जुटे सिर्फ कुछ सौ समर्थक।

ऑनलाइन क्रांति के दावों के बीच जमीनी समर्थन का अभाव दिखा।
बड़े आंदोलन के दावे, लेकिन धरातल पर सीमित मौजूदगी ने उठाए सवाल।
सोशल मीडिया की भीड़, जंतर-मंतर पर सन्नाटा!

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर बड़े-बड़े दावे करने वाली तथाकथित “काकरोच जनता पार्टी” का शक्ति प्रदर्शन राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर फीका पड़ता नजर आया। ऑनलाइन समर्थकों की लंबी फौज का दावा करने वाले आयोजकों को उस समय झटका लगा, जब धरातल पर महज कुछ सौ लोग ही जुट पाए।

कार्यक्रम से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बड़े स्तर पर प्रचार किया गया था और हजारों लोगों के पहुंचने का दावा किया जा रहा था। लेकिन जंतर-मंतर पर वास्तविक तस्वीर कुछ और ही दिखी। निर्धारित समय के बाद भी भीड़ उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ी और आयोजन सीमित दायरे में ही सिमटकर रह गया।

राजनीतिक गलियारों में इसे सोशल मीडिया और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर के तौर पर देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रियता को जनसमर्थन का पैमाना मान लेना अक्सर भ्रामक साबित होता है।

वहीं, विरोधी दलों ने इस आयोजन को लेकर तंज कसते हुए कहा कि “लाइक और रीट्वीट वोट या भीड़ में नहीं बदलते।” दूसरी ओर आयोजकों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है और आगे बड़े स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा।

जंतर-मंतर पर जुटी सीमित भीड़ ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सोशल मीडिया की लोकप्रियता वास्तव में सड़क पर जनसमर्थन में तब्दील हो पाती है, या फिर यह केवल डिजिटल दुनिया तक ही सीमित रह जाती है।

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