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छत्तीसगढ़ _दुर्गम जंगलों को जोड़ती नई उम्मीद: कोण्डापल्ली का बेली ब्रिज बदल रहा है बस्तर का नक्शा

नई दिल्ली , 2 जून 2026
जहाँ कभी जंगलों और पहाड़ियों के बीच रास्ते खत्म हो जाते थे, वहाँ आज विकास की नई लहर दस्तक दे रही है। बस्तर के सुदूर इलाकों में पहुंचना एक चुनौती हुआ करता था, लेकिन अब वह तस्वीर तेजी से बदल रही है।
बीजापुर जिले के कोण्डापल्ली में हाल ही में बना आधुनिक बेली ब्रिज इसी बदलाव का जीवंत प्रतीक है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार के तहत इस पुल का निरीक्षण किया और इसे दूरस्थ बस्तर तक विकास, विश्वास तथा सुशासन का मजबूत सेतु बताया।
यह पुल महज लोहे और इंजीनियरिंग का ढांचा नहीं है। यह उन हजारों ग्रामीणों की जिंदगी से जुड़ा है, जो सालों तक घने जंगलों, नक्सल प्रभाव और भौगोलिक कठिनाइयों के कारण मुख्यधारा से कटे हुए थे। बरसात में गांवों का संपर्क टूट जाना आम बात थी, लेकिन अब स्थिति बदल रही है।

बेली ब्रिज एक प्रकार का मॉड्यूलर, पूर्व-निर्मित (Prefabricated) ट्रस ब्रिज है, जिसका आविष्कार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश इंजीनियर डोनाल्ड बेली ने किया था। यह तकनीक विशेष रूप से दुर्गम, संवेदनशील और आपातकालीन क्षेत्रों में तेजी से पुल बनाने के लिए जानी जाती है।

भारतीय सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा बनाया गया यह बेली ब्रिज आधुनिक तकनीक का बेहतरीन उदाहरण है। पारंपरिक पुलों की तुलना में इसे पांच गुना कम लागत में और महज एक महीने के अंदर तैयार किया जा सकता है। यही वजह है कि दुर्गम बस्तर में यह तकनीक विकास को नई रफ्तार दे रही है।
बीजापुर जिले में अब तक 21 बेली ब्रिज बन चुके हैं। इन पुलों ने दूरस्थ गांवों को सड़क से जोड़ दिया है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, बाजार और रोजगार की राह आसान हुई है। अब पूरे साल आवागमन बना रहता है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा,
“हमारी प्राथमिकता अंतिम छोर तक विकास पहुंचाना है। सड़कें और पुल केवल ढांचे नहीं होते, ये शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर भविष्य की राह खोलते हैं।”
उन्होंने पुल निर्माण में लगे इंजीनियरों और श्रमिकों की सराहना करते हुए उन्हें विकास यात्रा के असली नायकों का सम्मान दिया। श्रमिकों से बातचीत में उन्होंने उनके अनुभव भी सुने।
नई बस्तर की कहानी
कोण्डापल्ली का यह बेली ब्रिज अब बस्तर की उस नई तस्वीर को प्रतिबिंबित कर रहा है, जहां विकास शहरों तक सीमित नहीं रह गया है। जंगलों के बीच बसे गांव भी अब मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।
यह पुल दो किनारों को नहीं, बल्कि दूरियों को जोड़ रहा है — भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक।
बस्तर अब बदल रहा है। और कोण्डापल्ली का यह बेली ब्रिज उस बदलाव की सबसे मजबूत मिसाल बनकर उभरा है।

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